ऐसा
माना जाता है कि आत्म
ज्ञान पाने के बाद मनुष्य
जीवन मुक्त हो जाता है,
और उसे जन्म मरण के चक्र से
गुजरना नहीं पड़ता। कैसे पहुँच सकते हैं उस स्थिति तक?
भौतिक अस्तित्व छोटी सी घटना है
अगर
आप दिन में
आकाश की ओर
देखते हैं तो
सूरज दिखाई देता
है। आपके अनुभव
में वह सबसे
अधिक प्रबल होता
है।
तो आकाश की विशालता का ही वास्तविक अस्तित्व है। सूरज, तारे, आप और मैं – हम सभी सिर्फ छोटी-छोटी घटनाएँ हैं, वाकई में क्षणिक घटनाएँ हैं हम।
रात में अगर
आप ऊपर देखते
हैं तो तारे
आपके अनुभव में
सबसे अधिक प्रबल
होंगे, लेकिन सूरज और
तारे दोनों ही
– और सूरज भी
एक तारा ही
है – विराट आकाश
की तुलना में
बहुत तुच्छ हैं।
हालांकि आम तौर
पर यह कभी
आपके अनुभव में
नहीं आता। तो
आकाश की विशालता
का ही वास्तविक
अस्तित्व है। सूरज,
तारे, आप और
मैं – हम सभी
सिर्फ छोटी-छोटी
घटनाएँ हैं, वाकई
में क्षणिक घटनाएँ
हैं हम।
आज
आधुनिक विज्ञान आपको यह
कह रहा है
कि सूरज की
भी एक आयु
है। यह स्वयं
जल कर धीरे-धीरे खत्म
हो रहा है।
जैसे कि आप
अपने जीवन को
जला कर खत्म
करते जा रहे
हैं, उसी प्रकार
सूरज को भी
बुखार चढ़ा है
और वह भी
अपने जीवन को
जला कर खत्म
कर रहा है।
आपका सामान्य तापमान
अट्ठनवे दशमलव छह डिग्री
फॉरेनहाइट है, सूर्य
का सामान्य तापमान
एक करोड़ पचास
लाख डिग्री सेल्सियस
है – लेकिन उसकी
भी एक आयु
है। वह भी
जल रहा है।
एक दिन वह
पूरी तरह जल
जाएगा। तो आप
जो कुछ भौतिक
अस्तित्व के रूप
में देख रहे
हैं, वह सिर्फ
एक छोटी-सी
घटना है। वास्तविक
अस्तित्व एक विस्तार
है, एक रिक्तता
है।
मानसिक, प्राणिक और आकाशीय शरीर को हम नहीं छू सकते
आप
जिसे व्यक्ति कहते
हैं वह बस
एक बुलबुले जैसा
है। इस बुलबुले
में स्वयं का
कोई तत्व नहीं
होता।
अगर हम चाहें तो स्थूल शरीर को दो हिस्सों में काटना की क्षमता हमारे अंदर है, लेकिन दूसरे शरीरों को काटने में हम समर्थ नहीं हैं।
वहाँ हवा थी।
उसने अपने चारों
ओर एक आवरण
बना लिया और
अब अचानक उसका
स्वयं का एक
अलग गुण हो
गया। मोटे बुलबुले
हैं, पतले बुलबुले
हैं, मज़बूत बुलबुले
हैं, कमज़ोर बुलबुले
हैं, बड़े बुलबुले
हैं, छोटे बुलबुले
हैं – लोगों की
तरह ही। अन्य
प्राणियों की तरह
भी।
लेकिन
जब बुलबुला फूटता
है तो बुलबुले
के अंदर का
तत्व कहाँ चला
जाता है? हवा
ने उसे वापस
ले लिया; वायुमंडल
ने उसे वापस
ले लिया। इस
प्रकार, एक बुलबुला
आकाशीय शरीर
के रूप में,
प्राणिक शरीर के
रूप में, मानसिक
शरीर के रूप
में और स्थूल
शरीर के रूप
में बनता है।
स्थूल शरीर को
हम जिस क्षण
चाहें गोली मार
सकते हैं। अगर
हम चाहें तो
स्थूल शरीर को
दो हिस्सों में
काटना की क्षमता
हमारे अंदर है,
लेकिन दूसरे शरीरों को
काटने में हम
समर्थ नहीं हैं।
जिसे आप अस्तित्व
कहते हैं, सिर्फ
वही यह कर
सकता है।
दोबारा जन्म लेने की संभावना से मुक्ति
जिसे
आप आध्यात्मिक प्रक्रिया
कह रहे हैं
वह बस यही
है। यह आत्मघात
का एक गूढ़
तरीका है।
दूसरे शब्दों में, हम रीसाइक्लिंग-बिन में बार-बार जाने की संभावना को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं। माँ का गर्भ बस रीसाइक्लिंग की एक थैली है।
यह स्थूल शरीर की
हत्या के संबंध
में नहीं है।
आप अपने अंदर
शरीर बनने की
बुनियाद को नष्ट
करने की कोशिश
कर रहे हैं।
आप उस मूलभूत
ढांचे को नष्ट
करने की कोशिश
कर रहे हैं
जिससे एक शरीर
बन सकता है।
कार्मिक तत्व जो
आकाशीय, प्राणिक और मानसिक
शरीर के रूप
में होते हैं,
यह भौतिक शरीर
सिर्फ इन्हीं तत्वों
से बनता है।
तो आप आध्यात्मिक
प्रक्रिया के द्वारा
उसे नष्ट करने
की कोशिश कर
रहे हैं। अपनी
जागरूकता के द्वारा,
अपने अभ्यास के
द्वारा, अपने प्रेम
के द्वारा, अपनी
भक्ति के द्वारा,
आप बस यही
करने की कोशिश
कर रहे हैं
कि जन्म लेने
की या दूसरा
शरीर धारण करने
की संभावना को
ही नष्ट कर
दिया जाए, उस
नींव को ही
नष्ट कर दिया
जाय जिसके ऊपर
एक भौतिक शरीर
बन सकता है।
दूसरे शब्दों में,
हम रीसाइक्लिंग-बिन
में बार-बार
जाने की संभावना
को खत्म करने
का प्रयास कर
रहे हैं। माँ
का गर्भ बस
रीसाइक्लिंग की एक
थैली है। बार
बार….. एक ही
प्रक्रिया से गुज़रना।
तो हम उसे
समाप्त करना चाहते
हैं।

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